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त्रासदी – एक शाम के बाद
दोस्तों ने कहा, देख के आ — बहुत बेदर्द है यह माँ-बेटे की कहानी। तो चली गई मैं एक शुक्रवार की शाम त्रासदी के बुलावे पर। स्टेज के एक कोने में, लैंप शेड के तले, एक हॉट प्लेट पर कॉफी रखी थी, एक किताब — बाइबल जैसी लाल, एक शीशे की बोतल पानी से भरी हुई, और एक प्याला। हाँ, एक चश्मा भी। दूसरे कोने पर एक अकेली कुर्सी। मानव कौल जल्दी ही आ गए। हॉट प्लेट ऑन की, कॉफी बनाई, और कुर्सी पर बैठ कर पीने लगे। धीरे धीरे ऑडिटोरियम भर गया। फिर सूचना के बाद उन्होंने हमसे अपना बचपन का नाम पूछा। मैंने
anasuyaray
6 days ago2 min read
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